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क्या चीन 400 बिलियन डॉलर से ईरान को उपनिवेश बना लेगा?

इससे पहले कि आप ईरान-चीन की इस डील के बारे में जाने, सबसे पहले आपको जानना चाहिए की जितनी ये रकम है उतना हमारे भारत की साल भर का बजट हैं 400 बिलियन डॉलर यानी लगभग 28 लाख करोड़ रुपए और आजादी के बाद से लेकर आज तक 72 सालों में हमने जितना विदेशी मुद्रा …

क्या मोदी बना पायेंगे भारत को पी-6?

इससे पहले आप यह जाने कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ताकत क्या है, और कितने बार भारत के पास इसमें शामिल के लिए मौका आया। उससे पहले आपको यह जानना चाहिए कि इसे बनाया ही क्यों गया। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल ही में हुई अमेरिका एवं संयुक्त राष्ट्र की यात्रा से यह …

क्या चीन एक और नरसंहार दोहराएगा हांगकांग में?

गगनचुंबी इमारतों और आर्थिक समृद्धि में एशिया के चार टाइगर में से एक कहे जाने वाले हांगकांग में लगातार पिछले 17 हफ्तों से ये क्या हो रहा है, इसकी शुरूआत कैसे हुई और ऐसा होने के पीछे का इतिहास क्या है इसके साथ ही क्यों दुनियां को डर है कि हांगकांग में चीन तियानानमेन स्क्वायर …

भारत को क्या मिला मोदी के यूएस-यूएन दौरे से

वैसे तो दुनियाँभर के सभी सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र के 74वें आमसभा को संबोधित किया है लेकिन किसी देश के साथ ऐसा पहली बार ही हआ है कि जब अमेरिका ने ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी के भाषण के बाद उसके समस्त राजनयिकों और अधिकारियों तथा उनके परिजनों की अमेरिकी यात्रा पर नये रूप में …

कुर्दिस्तान की मांग पर क्यों फंसी हैं विश्व महाशक्तियां

जब से मिडिल ईस्ट में तेल और गैस का भंडार मिला है तब से लेकर आज तक शायद ही कोई दशक रहा हो जब मध्य एशिया और खाड़ी के देशों में स्थिरता रही हो। 1970 के दशक में जब अमेरिका ने यहां के तेल पर एकछत्र राज करने के लिए खाड़ी देशों में सुरक्षा का …

ट्रम्प का अमेरिका, फर्स्ट या अंतिम में : उलझती विदेश नीति!

शुरूआत कहाँ से करें! 20 वीं शताब्दी में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे ताकतवर राष्ट्र रहे अमेरिका की या वर्तमान में 2016 के बाद से असहाय हो रहे अमेरिकी नीति से। आज दुनियाँ का कोई भी बड़ा या उभरता देश नहीं बचा जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल में सहजता से रहने दिया …

भारत के बिना 21वीं सदी और चीन की चतुराई

जिस तरह 19वीं सदी में यूरोप की अर्थवयवस्था और 20वीं सदी में अमेरिका का बोलबाला था, उसी तरह राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले ग्लोबल टाइम्स कहा है कि भारत के बिना 21वीं सदी एशिया की नहीं बन सकती दुसरी ओर कश्मीर को लेकर भारत की आक्रमकता साथ ही टेंपल डिप्लोमेसी एवं सॉफ्ट …

गुटनिरपेक्ष संघ से अलग राह पर क्यों है भारत

ऐसा लगातार दूसरी बार और इतिहास में पहली बार हुआ है कि जिस देश ने इस संघ को बनाने में अपना सबसे बड़ा योगदान दिया ताकि सभी विकासशील देशों को दो महाशक्तियां की ध्रुवीकरण से बचाया जा सके, अब वही देश इस संघ से दूर होने की कोशिश कर रहा है। लेकिन ऐसा आखिर क्यों …

चीन को सुरक्षा परिषद से हटाया जा सकेगा?

कोरोनावायरस को लेकर दुनिया भर में क्या चल रहा है यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है लेकिन फिलहाल सबसे बड़ी बहस यह है की दुनिया भर में इस महामारी को फैलाने और छुपाने के कारण दुनिया जो त्रासदी झेल रही है क्या उसके लिए चीन को दंड दिया जा सकता है। अभी हाल …

सात दशकों का युवा गणतंत्र और गंभीर लोकतांत्रिक चुनौतियां

इस धरती का सबसे विशाल लोकतंत्र यानी भारत अपने गणतंत्र का सत्तरवां वर्ष पूरे ही देश में धूमधाम से मना रहा है दूसरी ओर विभिन्न भागों में देश की आधी जनसंख्या कुछ कानूनों और बढ़ती कट्टरता को लेकर विरोध प्रदर्शन में लगा हुआ है। इतना ही नहीं, जिस देश से हमने आजादी पाई वहां की …

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