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अमेरिकी वर्चस्व को ध्वस्त करने की भारत की रणनीति

पिछले तीन दशकों में, दुनिया ने वैश्विक शक्ति संतुलन में एक नाटकीय बदलाव देखा है। सबसे पहले सोवियत संघ का बिखराव, फिर अमेरिकी प्रभुत्व के पतन और चीन-भारत जैसे नए भू-राजनीतिक खिलाड़ियों के उदय के साथ, भारत की विदेश नीति गुटनिरपेक्ष रुख से धीरे-धीरे एक अधिक मुखर और स्वतंत्र वैश्विक उपस्थिति की ओर विकसित हुई …

ताइवान पर चीनी आक्रमण अब और करीब!

यह वास्तविक सत्य है कि इतिहास खुद को ज़रूर दोहराता है। पूरी दुनियां को त्रासदी में धकेलने के बाद अब कोरोनावायरस वापस उसी जगह पहुंच गया है जहां से उसकी शुरुआत हुई थी। हालांकि जिस भयानकता से यह पूरे चीन में फ़ैल रहा है, उससे यह संभावना फिर से प्रबल हो रही है कि अपनी …

भारत की वैक्सीन डिप्लोमेसी फेल?

स्पेनिश फ्लू महामारी के एक सदी बाद आज कोरोनावायरस ने मानवजाति को उस मुकाम पर ला खड़ा किया है जहां पर औद्योगिक क्रांति, तकनीक और संसाधनयुक्त विकास सिर्फ छलावा रह गया है। आर्कटिक से लेकर अंटार्कटिका तक और सहारा रेगिस्तान से लेकर 4.60 करोड़ एकड़ में जलकर ख़ाक हो चुके ऑस्ट्रेलिया के जंगलों तक, आज …

इस्राइल-फिलिस्तीन युद्ध के बीच निशाने पर ईरान

इस्राइल में जो कुछ हो रहा है उसकी शुरुआत यकीनन ऐसी नहीं थी और ना ही किसी ने यह अंदाजा लगाया था कि विश्व जहां कोरोना महामारी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ इस्राइल-फिलिस्तीन युद्ध की तरफ बढ़ जाएंगे। हालांकि यह युद्ध रोका जा सकता था, यदि येरूशलम के अल-अक्सा मस्जिद में कुछ फिलिस्तीनी …

क्वाड 2.0 : भारतीय वर्चस्वता बढ़ाने में कितना मददगार

अक्टूबर का महीना और 1962 का साल। यही वो समय था जब चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने भारत पर हमला 38000 वर्ग किमी जमीन पर कब्जा कर लिया था। आधी सदी बाद, आज फिर से वही समय आया है जब विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव चरम पर है, और सैन्य तथा राजनयिक रिश्तों में …

इजरायल पर क्यूं इतना मेहरबान है अमेरिका?

इजरायल, दुनियां का एकमात्र यहूदी देश। जिसे आज भी दुनिया के 29, विशेषकर मुस्लिम देश मान्यता नहीं देते, जिनमें हमारे पड़ोसी पाकिस्तान और बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि छोटा सा बौद्ध देश भूटान भी शामिल है। इस देश ने न सिर्फ अपने समुदाय का मानव इतिहास में सबसे दुर्दांत नरसंहार देखा बल्कि एक राष्ट्र बनने के …

क्या यूरोपीय संघ से इटलेक्जिट मुमकिन है?

1918 में स्पेनिश फ्लू के 100 सालों बाद आज एक बार फिर कोरोनावायरस महामारी ने 17 लाख पीड़ितों के साथ यूरोप महाद्वीप को अपना केंद्र बना लिया है विशेषकर स्पेन, ब्रिटेन और इटली को। ऐसी परिस्थिति में इस बात की भी चर्चा प्रारंभ हो चुकी है कि कोरोनावायरस संक्रमण में यूरोपियन यूनियन द्वारा उचित मदद …

चीन के आगे सरेंडर मोदी सरकार!!

यह ज़रूरी नहीं कि कोई देश सैन्य मामलों में हार जाए तो ही उसे आत्मसमर्पण कहा जाएगा। आज की दुनिया ग्लोबलाइजेशन और अर्थव्यवस्था पर आधारित है और किसी देश के सुपरपावर बनने का तात्पर्य है कि वह सिर्फ सैन्य मामले में ही नहीं बल्कि आर्थिक, कूटनीतिक, सामरिक मामलों के साथ अंतरिक्ष एवं साइबर क्षेत्र में …

जी7 का विस्तार या अमेरिकी जाल!

1973 का वह दौर, जब विश्व में तेल की समस्या उत्पन्न हो गई थी, अमेरिका अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंदी सोवियत संघ के साथ शीत युद्ध में था और भारत 1974 में स्माइलिंग बुद्धा के जरिए अपने पहले परमाणु परीक्षण की तैयारी कर रहा था। उसी समय अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने तेल समस्या को लेकर …

बौखलाए चीनी ड्रैगन पर हावी भारतीय हाथी

58 सालों बाद आज सीमाएं फिर से लहूलुहान हैं और स्थितियां नाजुक बनी हुई हैं। चूंकि दोनों देश प्रत्यक्ष युद्ध में नहीं जाना चाहते इसलिए बातचीत लगातार जारी है, लेकिन चीन की धमकी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। ग्लोबल टाइम्स कह रहा है कि पाकिस्तान और नेपाल हमारे साथ हैं और …

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