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भारत के बिना 21वीं सदी और चीन की चतुराई

जिस तरह 19वीं सदी में यूरोप की अर्थवयवस्था और 20वीं सदी में अमेरिका का बोलबाला था, उसी तरह राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले ग्लोबल टाइम्स कहा है कि भारत के बिना 21वीं सदी एशिया की नहीं बन सकती दुसरी ओर कश्मीर को लेकर भारत की आक्रमकता साथ ही टेंपल डिप्लोमेसी एवं सॉफ्ट …

म्यांमार के सहारे स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स का मुकाबला

फिलहाल यह वो दौर हैं जब म्यांमार पूरी दुनिया में रोहिंग्या मुसलमानों के मामले में अकेला पड़ चुका है। अमेरिका, यूरोपियन यूनियन के अलावा ना सिर्फ अधिकतर देशों ने म्यांमार के ऊपर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं बल्कि उनके आर्मी चीफ मिन आंग हाइंग पर भी प्रतिबंध लगा दिया है, और तो और 57 देशों वाले ऑर्गेनाइजेशन …

अमेरिका से दूर कोरिया-जापान नयी राह पर

एक समय था जब जापान और उसकी इंपीरियल आर्मी दुनियां की सबसे घातक सेना हुआ करती थी जिसमें निंजा तकनीक से लैस लड़ाके अपने साम्राज्य की समृद्धि के लिए लड़ते थे, इसी के दम पर उन्होंने न सिर्फ रूस और चीन जैसे बड़े देशों को हराया बल्कि प्रशांत महासागर से लेकर हिन्द महासागर में अंडमान …

गांधी के सहारे आरसीईपी मुक्त व्यापार समझौते से बाहर हुआ भारत

“भारत अधिक से अधिक क्षेत्रीय एकीकरण, मुक्त व्यापार और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का पालन करता है. लेकिन वर्तमान समझौते का जो प्रारूप है उसमें भारत के हितों का पूरी तरह से ख्याल नहीं रखा गया है. क्योंकि जब मैं आरसीईपी समझौते को सभी भारतीयों के हितों से जोड़कर देखता हूं, तो मुझे सकारात्मक जवाब …

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