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अमेरिकी वर्चस्व को ध्वस्त करने की भारत की रणनीति

पिछले तीन दशकों में, दुनिया ने वैश्विक शक्ति संतुलन में एक नाटकीय बदलाव देखा है। सबसे पहले सोवियत संघ का बिखराव, फिर अमेरिकी प्रभुत्व के पतन और चीन-भारत जैसे नए भू-राजनीतिक खिलाड़ियों के उदय के साथ, भारत की विदेश नीति गुटनिरपेक्ष रुख से धीरे-धीरे एक अधिक मुखर और स्वतंत्र वैश्विक उपस्थिति की ओर विकसित हुई …

क्वाड 2.0 : भारतीय वर्चस्वता बढ़ाने में कितना मददगार

अक्टूबर का महीना और 1962 का साल। यही वो समय था जब चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने भारत पर हमला 38000 वर्ग किमी जमीन पर कब्जा कर लिया था। आधी सदी बाद, आज फिर से वही समय आया है जब विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव चरम पर है, और सैन्य तथा राजनयिक रिश्तों में …

भारत के बिना 21वीं सदी और चीन की चतुराई

जिस तरह 19वीं सदी में यूरोप की अर्थवयवस्था और 20वीं सदी में अमेरिका का बोलबाला था, उसी तरह राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले ग्लोबल टाइम्स कहा है कि भारत के बिना 21वीं सदी एशिया की नहीं बन सकती दुसरी ओर कश्मीर को लेकर भारत की आक्रमकता साथ ही टेंपल डिप्लोमेसी एवं सॉफ्ट …

सात दशकों का युवा गणतंत्र और गंभीर लोकतांत्रिक चुनौतियां

इस धरती का सबसे विशाल लोकतंत्र यानी भारत अपने गणतंत्र का सत्तरवां वर्ष पूरे ही देश में धूमधाम से मना रहा है दूसरी ओर विभिन्न भागों में देश की आधी जनसंख्या कुछ कानूनों और बढ़ती कट्टरता को लेकर विरोध प्रदर्शन में लगा हुआ है। इतना ही नहीं, जिस देश से हमने आजादी पाई वहां की …

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