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अमेरिकी वर्चस्व को ध्वस्त करने की भारत की रणनीति

पिछले तीन दशकों में, दुनिया ने वैश्विक शक्ति संतुलन में एक नाटकीय बदलाव देखा है। सबसे पहले सोवियत संघ का बिखराव, फिर अमेरिकी प्रभुत्व के पतन और चीन-भारत जैसे नए भू-राजनीतिक खिलाड़ियों के उदय के साथ, भारत की विदेश नीति गुटनिरपेक्ष रुख से धीरे-धीरे एक अधिक मुखर और स्वतंत्र वैश्विक उपस्थिति की ओर विकसित हुई …

ताइवान पर चीनी आक्रमण अब और करीब!

यह वास्तविक सत्य है कि इतिहास खुद को ज़रूर दोहराता है। पूरी दुनियां को त्रासदी में धकेलने के बाद अब कोरोनावायरस वापस उसी जगह पहुंच गया है जहां से उसकी शुरुआत हुई थी। हालांकि जिस भयानकता से यह पूरे चीन में फ़ैल रहा है, उससे यह संभावना फिर से प्रबल हो रही है कि अपनी …

क्या मोदी बना पायेंगे भारत को पी-6?

इससे पहले आप यह जाने कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ताकत क्या है, और कितने बार भारत के पास इसमें शामिल के लिए मौका आया। उससे पहले आपको यह जानना चाहिए कि इसे बनाया ही क्यों गया। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल ही में हुई अमेरिका एवं संयुक्त राष्ट्र की यात्रा से यह …

गुटनिरपेक्ष संघ से अलग राह पर क्यों है भारत

ऐसा लगातार दूसरी बार और इतिहास में पहली बार हुआ है कि जिस देश ने इस संघ को बनाने में अपना सबसे बड़ा योगदान दिया ताकि सभी विकासशील देशों को दो महाशक्तियां की ध्रुवीकरण से बचाया जा सके, अब वही देश इस संघ से दूर होने की कोशिश कर रहा है। लेकिन ऐसा आखिर क्यों …

ईरान, उत्तर कोरिया का परमाणु प्रेम और विश्व को युद्ध में झोंकते ट्रंप

ईरान और अमेरिका में तनाव के बीच ईरानी राजनयिक ने संयुक्त राष्ट्र, रूस और चीन को छोड़कर शांति बहाली के लिए भारत को मध्यस्थता करने का प्रस्ताव देकर प्रत्यक्ष रूप से भारत को भी इस विवाद के केंद्र में पहुंचा दिया है। हालांकि इस क्षेत्र में भारत सैन्य रूप से बड़ा खिलाड़ी है इसलिए यह …

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